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Prashant Kishor reaveal his future strategy for Bihar | प्रशांत किशोर नहीं बनाएंगे कोई नई पार्टी, प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया अपनी नई रणनीति का ऐलान

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हाल ही में कांग्रेस के ऑफर को ठुकराने के बाद उन्होंने खुद सक्रिय राजनीति में आने की घोषणा की है। उन्होंने किसी नई पार्टी का ऐलान तो नहीं किया, लेकिन यह संकेत दिया है कि वह अगले 3-4 महीनों में ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार को बदलने की सोच रखने वाले 17 हजार से अधिक लोगों को जोड़ा गया है। वह सभी से चर्चा करेंगे और यदि इनमें से अधिकांश की राय बनती है तो किसी संगठन या पार्टी का गठन किया जा सकता है।

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उन्होंने कहा, ”मैं व्यक्तिगत रूप से इनसे मिलने वाला हूं और जो जन सुराज की सोच है आगे उसे बिहार में उसे उतारने के लिए जो करने की जरूरत है, उनसे बात रखने वाला हूं।” इसके अलावा उन्होंने कहा, “बिहार आज 30 साल के लालू और नीतीश के राज के बाद भी देश का सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य है। विकास के कई मानकों पर बिहार आज भी देश के सबसे निचले पायदान पर है। बिहार अगर आने वाले समय में अग्रणी राज्यों की सूची में आना चाहता है तो इसके लिए नई सोच और नए प्रयास की जरूरत है।”

पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और मुख्यमंजत्री नितीश कुमार पर निशाना साधते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “लालू जी और उनके समर्थन का मानना है कि सामाजिक न्याय हो रहा था। 2014 के बाद नीतीश जी और उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने विकास का काम किया है. इन दावों में कुछ तो सही है। लेकिन उनके दावों में जितनी सच्चाई है, यह भी सच है कि बिहार भारत का सबसे पिछड़ा राज्य है। इसलिए अगर आप अगले 10-15 साल देखेंगे तो यह सड़क बिहार को विकास की ओर नहीं ले जाएगी।”

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार को नई सोच के साथ बदलने की जरूरत है। बिहार के वे लोग जिनमें यहां की समस्या को सुलझाने की क्षमता है और बिहार को बदलने का जज्बा है, उन लोगों को साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं। चुनावी रणनीतिकार ने कहा कि जो लोग यहां के सामाजिक और राजनीतिक जमीन से जुड़े हुए हैं। उन्हें एक प्लैटफॉर्म पर खड़ा करना है। प्रेस कॉन्फ्रेंस से ही प्रशांत किशोर ने अपना सर्वस्व बिहार को सुरक्षित और विकासशील बनाने के लिए योगदान देने का ऐलान किया है।

उन्होंने ये भी कहा कि दो अक्टूबर से वो चंपारण से पदयात्रा निकालेंगे। उन्होंने कहा, ”2 अक्टूबर से मैं खुद पश्चिमी चंपारण से 3 हजार किलोमीटर की यात्रा करूंगा। जब तक बिहार के सभी गांव, मोहल्ले शहर तक ना पहुंच जाया जाए। 8 महीने से एक साल के भीतर यह यात्रा करूंगा। हर उन व्यक्ति से मिलूंगा, जो मिलना चाहेंगे। उनको जन सुराज की परिकल्पना से जोड़ा जाएगा।”

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