स्वास्थ्य

How to deal with loneliness and emotional breakdown mental health in hindi pra

How to deal with loneliness and emotional breakdown mental health in hindi pra


How To Deal With Loneliness And Emotional Breakdown: हर वक्‍त लो फील (Low feel) करना, बात-बात पर गुस्सा आना और उदास होना, रोने लगना (Emotional Breakdown) आदि ये ऐसी मानसिक स्थितियां (Mental Health) हैं जो लाइफ में कुछ गलत होने या काम का अधिक दबाव होने के कारण होती हैं. कई बार ऐसी समस्‍याएं हॉर्मोनल बदलाव या किसी खास दवा के सेवन के कारण भी होती है. दिक्‍कत तब आती है जब सच में आप अकेला (Loneliness) महसूस करते हैं और किसी के साथ अपनी बातों या परेशानियों को शेयर नहीं कर पाते हैं. ऐसी स्थिति में आप सीधे मनोवैज्ञानिक से मदद ले सकते हैं.

अगर आपके साथ ये समस्याएं हॉर्मोनल असंतुलन या किसी मेडिकल दिक्कस के कारण हो रही हैं तो आपको डॉक्‍टर दवाएं देंगे और आप बेहतर महसूस करेंगे. लेकिन अगर आप किसी भावनात्मक या पारिवारिक समस्या से जूझ रहे हैं तो काउंसलर आपकी बातों को सुनकर कुछ आसान टास्क और थेरेपी की मदद से आपकी परेशानियों को दूर करने में मदद करेंगे.

खुद को इस तरह मानसिक रूप से उबारें

1.तनाव को काबू में रखना सीखें

अगर आप महसूस कर रहे हैं कि आप तनाव में है तो तुरंत उस जगह से उठें और खुली जगह में जा कर गहरी सांस लें. ऐसा करने से आप बेहतर महसूस करेंगे. अगर आप किसी मीटिंग में है तो 10 तक गिनती गिनें और  ‘एक झुमरी तलैया, दो झुमरी तलैया, तीन झुमरी तलैया’ 10 बार बोलें. आप बेहतर महसूस करेंगे.

2.मानसिक विकृतियों को पहचाने

आप उस क्षण को जानने की कोशिश करें कि आखिर किन बातों को सोचने पर आप भावनात्‍मक रूप से कमजोर महसूस करते हैं. अगर आप पहचान लेते हैं तो उसे डायरी में लिखें और एक लिस्‍ट अपनी वॉल पर चिपका दें. अगली बार से इस टॉपिक को यह मान कर इग्‍नोर करें कि ये बेकार और असामान्‍य बातें हैं जिससे जितना दूर रहा जाए बेहतर होगा.

3.खुद के अंदर विश्वास को खोजें

भावात्मक मजबूती का विकास करना है तो खुद के अंदर के विश्‍वास को ढूंढें. यह सोचें कि आप किस काम को एन्‍जॉय करते हैं और किस में आप बेहतर हैं. जिस काम में आप कमजोर हैं उस पर मेहनत करें. आप खुद में इप्रूव करेंगे और बेहतर महसूस करेंगे.

4.जीवन की जरूरतों को समझें

अपने जीवन की उन जरूरतों को समझने की कोशिश करें जिसे आप अगले 10 सालों में अचीव करना चाहते हैं. ये किसी भी तरह की जरूरत हो सकती है. मसलन खुश होना, दुनिया घूमना, छोटी-छोटी आदतों को जीवन में शामिल करना आदि.

5.इंसानी जरूरतों को स्‍वीकारें      

ये याद रखें कि आप एक इंसान हैं और इंसान भावनात्‍मक ना हुआ तो मशीन बन जाएगा. ऐसे में कभी कभी अगर आप कमजोर पड़ें तो शर्मिंदगी ना महसूस करें. सुख दुख को स्‍वीकारें.

6.कुछ बात को व्यक्तिगत रूप से न लें

आप दूसरों के विचारों या कार्यों को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं पर उसके विरुद्ध आप अपनी प्रतिक्रिया पर नियंत्रण रख सकते हैं. लोग क्‍या सोचेंगे ऐसे विचारों से दूर रहें.

7.अपने शारीरिक स्वास्थ्य का ख्याल रखें

आपका शारीरिक स्वास्थ्य आपके भावात्मक स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करता है. शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल करने से आपका तनाव कम होने में मदद मिलेगी. इ‍सलिए व्यायाम-योग आदि करें. व्‍यायाम करने से आपके शरीर में एंडोर्फिन निकलता है जो आपको खुश रखता है. अगली बार जब आप उदास हों तो आप सैर करने, दौड़ लगाने या वर्क आउट करने जाएं.

8.विशेषज्ञों की लें मदद

इन सब के बावजूद अगर आप बेहतर नहीं महसूस कर पाएं तो साइक्रिटिस्‍ट या साइकोलोजिस्‍ट की मदद लें.  (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

Tags: Health, Lifestyle, Mental health



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