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How does an overdose of social media affect the mental health of teenagers nav

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Social Media Overdose affect the mental health of teenagers : आज के दौर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल सामान्य बात है, खासतौर से किशोर और युवाओं ने तो इसे जरूरत मान लिया, लेकिन इसके नुकसानों से रूबरू होना भी जरूरी है. दुनिया की कई स्टडीज में ये बात निकलकर आई है कि सोशल मीडिया ज्यादा इस्तेमाल यानी इसका ओवरडोज यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. और ऐसा उन किशोरों (Teenagers) के साथ ज्यादा होता है जो पहले से अवसाद (depression), तनाव (stress) या चिंता (anxiety) की ज्यादा शिकायत करते है. 19 अक्टूबर को दैनिक हिंदुस्तान में छपी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक एक स्टडी में सिडनी के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल के करीब पचास हानिकारक प्रभाव हैं. यह सभी प्रभाव सिर्फ मानसिक सेहत से जुड़े नहीं हैं, बल्कि हमारे काम करने की क्षमता भी इनसे प्रभावित हो रही है. द स्टेटमेन (The Statesmen) में छपी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तेजी से विकास कर रहे हैं, विशेष रूप से भारत में, लागू किए गए लॉकडाउन में 70 पीसी की भारी वृद्धि देखी गई। भारतीय औसतन प्रतिदिन लगभग 2.25 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं, जो कि वैश्विक औसत प्रतिदिन 2.5 घंटे से थोड़ा कम है.

भारत में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या लगातार बढ़ी है और साल 2021 में ये 448 मिलियन हो गई, जो मुख्य रूप से पूरे भारत में स्मार्टफोन के व्यापक उपयोग से बढ़ी है, जबकि इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़कर लगभग 624 मिलियन हो गई है, जो भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 45 प्रतिशत है.

क्या कहते हैं आकंड़े
डेटा वेबसाइट स्टेटिस्टा (Statista) के अनुसार,  भारत में कुल सोशल मीडिया यूजर्स में से 31 प्रतिशत यूजर्स जो हैं वो 13-19 साल आयु वर्ग के किशोर हैं.  ये किसी से छिपा नहीं है कि सोशल मीडिया एक औसत टीनएजर (किशोर) की रोजमर्रा की जिंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है. चाहे वह इंस्टाग्राम पर तस्वीरें साझा करना हो, स्नैपचैट पर दोस्तों को मैसेज करना हो, या टिकटॉक पर डांस कोरियोग्राफ करना हो, किशोर सोशल मीडिया की ऑनलाइन दुनिया में छाए रहते हैं.

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लेकिन क्या सोशल मीडिया टीनएजर्स के लिए अच्छा है? जानकार बताते हैं कि टीनएजर्स पर सोशल मीडिया का इफैक्ट महत्वपूर्ण हो सकता है, इसलिए इसके बारे में जानना जरूरी है. क्योंकि ये केवल दिन के दौरान नींद खोने और विचलित (distracted) होने का मामला नहीं है, सोशल मीडिया का टीनएजर्स के मानसिक स्वास्थ्य पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

क्यों जरूरी है ध्यान देना 
चूंकि टीनएज ब्रेन अभी भी विकसित हो रहा है, इसलिए इनके ऑनलाइन टाइम को लेकर अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है. क्योंकि किशोर कभी-कभी अपने स्क्रीन टाइम को खुद नियमित करने के लिए संघर्ष कर सकते हैं, ऐसे में इससे होने वाले नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है. नतीजतन, टीएजर्स का सोशल मीडिया का यूज अक्सर इससे संबंधित होता है.  डिप्रेशन (depression), चिंता (anxiety), कम आत्म सम्मान (low self-esteem) ईर्ष्या (envy) और तनहाई (loneliness).

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घर के टीनएजर्स के अपने डिवाइसेस पर ज्यादा टाइम बिताने से इन तनावों से बचने की क्षमता और कम हो सकती है.उनके सामने अनुचित सामग्री या चित्रण के आने की अधिक संभावना हो सकती है, उदाहरण के लिए उनके दोस्त अगर जोखिम भरे व्यवहार (जैसे, नशे का सेवन, खतरनाक ‘स्टंट’) या यहां तक ​​कि आत्म-हानिकारक व्यवहारों (self-injurious behaviours) में संलग्न हैं,  जो अक्सर सोशल मीडिया के माध्यम से होता है,  ये सभी चिंता, अकेलापन और अवसाद से जुड़ी होती है.

किशोर 7.22 मिनट फोन पर बिताते हैं
यूएस में कॉमन सेंस मीडिया (common sense media) द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि किशोर हर दिन औसतन 7 घंटे 22 मिनट अपने फोन पर बिताते हैं. और इस स्क्रीन टाइम में कोई स्कूल वर्क या संगीत पढ़ने या सुनने से संबंधित गतिविधियाँ भी शामिल नहीं हैं.

Tags: Health, Health News, Mental health



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