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Food Dye Effects: खाने की रंग-बिरंगी चीजें देखकर ललचाता है मन? हो जाएं सावधान…वरना बन जाएंगे पेट रोगी

Food Dye Effects: खाने की रंग-बिरंगी चीजें देखकर ललचाता है मन? हो जाएं सावधान...वरना बन जाएंगे पेट रोगी


Food Dye’s Adverse Effects on Health: त्यौहारों का मौसम आ गया है और बाजार खाने की रंग-बिरंगी चीजों से भरे पड़े हैं, जो अक्सर टेस्ट बड्स को ललचाते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इन कलरफुल फूड आइटम्स में से ज्यादातर फूड डाई का इस्तेमाल करके बनते हैं, जिनका सेवन आपके शरीर के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है. मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के वलीउल खान के अनुसार, फूड डाई वाली चीजें खाने से इंसान के पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचता है. आईबीडी (Inflammatory Bowel Disease), क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस सभी को फूड डाई या एल्यूरा रेड के लंबे समय तक सेवन से खतरा हो सकता है. स्टडी में पता चला है कि, एलुरा रेड एसी आंत के स्वास्थ्य के लिए खराब है और सूजन को बढ़ावा देता है.

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डाई सीधे गट बैरियर फंक्शन को बाधित करती है और सेरोटोनिन सिंथेसिस को बढ़ाती है. सेरोटोनिन सिंथेसिस आंतों का हार्मोन/न्यूरोट्रांसमीटर है, जो गट माइक्रोबायोटा की संरचना को बदलता है और कोलाइटिस के जोखिम को बढ़ावा देता है. वलीउल खान बताते हैं कि एलुरा रेड (Allura Red), जिसे एफडी एंड सी रेड 40 (FD & C Red 40) और फूड रेड 17 (Food Red 17) के रूप में भी जाना जाता है, जैम, जैली, कैंडी, वाइन्स, फ्रोजन मीट और फिश, सॉफ्ट ड्रिंक्स, दही, आइसक्रीम, चिप्स, डिब्बाबंद फल और सब्जियों इत्यादि में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख इंग्रेडिएंट है. अक्सर बच्चों में आकर्षित करने के लिए फूड आइटम्स को कलरफुल किया जाता है.

मनुष्य की आंत को प्रभावित करते हैं एल्युरा रेड या फूड डाई
पिछले कुछ दशकों में, एल्यूरा रेड जैसे कृत्रिम खाद्य रंगों का उपयोग काफी बढ़ गया है, लेकिन इस बात पर कोई पूर्व शोध नहीं हुआ है कि ये रंग आंत के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करते हैं. नेचर कम्युनिकेशंस में, खान और उनकी टीम ने अपने शोध के परिणामों का खुलासा किया. पहले लेखक युन हान (एरिक) क्वोन हैं, जो हाल ही में वलीउल खान की प्रयोगशाला में पीएचडी स्नातक हैं. यह अध्ययन पेट के स्वास्थ्य पर एलुरा रेड के महत्वपूर्ण हानिकारक प्रभावों को प्रदर्शित करता है और इन प्रभावों के लिए महत्वपूर्ण कारक के रूप में गट सेरोटोनिन की पहचान करता है. वलीउल खान कहते हैं कि उनकी लैब ने जो शोध किया है, उसके निष्कर्षों का आंतों की सूजन की रोकथाम और प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रभाव है. वह पैथोलॉजी एंड मॉल्क्यिुलर मेडिसिन डिपार्टमेंट के एक प्रोफेसर हैं और फार्नकोम्बे फैमिली डाइजेस्टिव हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक प्रमुख इंवेस्टिगेटर हैं.

एल्यूरा रेड का सेवन बच्चों में कई बीमारियों को बढ़ावा देता है
खान और उनकी टीम ने जो स्टडी की है, उसमें पता चला है कि एल्यूरा रेड का सेवन बच्चों में कुछ एलर्जी, इम्युनिटी डिसऑर्डर और व्यवहार संबंधी समस्याओं को जन्म देता है, जैसे कि अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर. वलीउल खान ने कहा कि आईबीडी इंसान की आंत की ऐसी स्थितियां हैं, जिसमें जलन, कब्ज, गैस और अपच को जन्म देती हैं. दुनिया भर में लाखों लोग इससे प्रभावित हैं. इस तरह की परेशानियों के सटीक कारण अबभी पूरी तरह से समझ में नहीं आए हैं. अध्ययनों से पता चला है कि रोगग्रस्त प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, आनुवंशिक कारक, आंत माइक्रोबायोटा असंतुलन और पर्यावरणीय कारक इन स्थितियों को ट्रिगर कर सकते हैं.

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फूड डाई वाली चीजों के सेवन से पेट की कई समस्याएं होती हैं
हाल के वर्षों में अतिसंवेदनशील जीन की पहचान करने और आईबीडी की वजह पता करने में इम्युनिटी सिस्टम और होस्ट माइक्रोबायोटा की भूमिका को समझने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. हालांकि, आईडीबी के लिए पर्यावरणीय कारकों में सामान्य तौर पर पश्चिमी आहार शामिल हैं, जिनमें प्रोसेस्ड फैट, रेड और प्रोसेस्ड मीट, शुगर और फाइबर की कमी शामिल है. वलीउल खान ने कहा कि पश्चिमी आहार और प्रोसेस्ड फूड में बड़ी मात्रा में प्रिजर्वेटिव्स और फूड डाई का इस्तेमाल होता है. उन्होंने कहा कि उनकी टीम का यह रिसर्च आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले फूड डाई और आईबीडी के बीच एक लिंक स्थापित करता है.

Tags: Health News, Healthy Diet, Lifestyle



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