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Burnt skin tissue can be regenerated with 3d bio printing study nav – जली हुई स्किन के टिशू को 3डी बायोप्रिंटिंग से दोबारा बनाया जा सकता है

Burnt skin tissue can be regenerated with 3d bio printing study nav - जली हुई स्किन के टिशू को 3डी बायोप्रिंटिंग से दोबारा बनाया जा सकता है


Regenerate skin tissue with 3D Bio printing : वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार हर साल जलने की घटनाओं के 10 लाख से अधिक मामलों में विशेष इलाज की जरूरत होती है. घाव से इफैक्टिव डैमेज स्किन (Damage Skin) को सर्जरी द्वारा हटाकर और स्किन ट्रांसप्लांट (Skin Transplant) के साथ इसे रिक्रिएट (पुन: निर्मित) कर गहन जलने की चोटों (severe burn injuries) का इलाज किया जाता है. अभी तक जो रिप्लेसमेंट सब्सटेंस इस्तेमाल किए जाते रहे हैं उनमें सभी तरह के स्किन सेल्स नहीं होते हैं और दूसरों से लेकर ट्रांसप्लांट स्किन को अक्सर इम्यून सिस्टम द्वारा खारिज कर दिया जाता है. तिरुवनंतपुरम के श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SCTIMST) के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में एक ऐसा सॉल्यूशन खोजा है, जिसमें 3डी बायोप्रिंटिंग (3D Bioprinting) का यूज करके स्किन के टिशू को फिर से बनाया  (Reconstruction) जा सकता है. रिसर्चर्स को एक नॉन-टॉक्सिक अस्थायी बहुलक ढांचे (non-toxic floating polymer framework) के अंदर स्किन सेल्स के साथ टिशू प्रोड्यूस करने में सफलता मिली है.

3डी बायोप्रिंटिंग में उपयुक्त पॉलीमर बेस्ट बायोइंक (Bioink) का यूज करके प्लेटफॉर्म में सेल लेयर, आर्किटेक्चर को डिजाइन किया गया है, जो बोयोप्रिंटेड टिशूज की सरंध्रता (porosity) और चिपकने को नियंत्रित करता है.

क्या कहते हैं जानकार
इस स्टडी से जुड़ी रिसर्चर लक्ष्मी टी सोमशेखरन (Lakshmi T.Somasekharan) के मुताबिक, बायोप्रिंटेड स्किन ने सूक्ष्म और मैक्रो-आकार (micro and macro-sized) के छिद्रों (pores) के साथ छिद्र संरचना (pore structure) को बेहतर ढंग से कंट्रोल  किया है, जो पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है. ये माइक्रो-मैक्रो साइज के छिद्र पूरे निर्माण के दौरान प्रभावी सेल घुसपैठ और-प्रवास (Effective cell infiltration and migration) में मदद करते हैं और ऑक्सीजन तथा पोषक तत्वों के ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देते हैं.

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स्टडी में शामिल एक अन्य रिसर्चर नरेश कासोजू (Naresh Kasoju) के मुताबिक, जलीय माध्यम से संपर्क में आने पर, बायोप्रिंटेड संरचना (bioprinted structure) में ज्यादा फुलाव नहीं देखा गया है और फिजिकल फिगर और शेप में भी कोई बदलाव नहीं था. ये बायोइंक के बेहतर गुणों को दर्शाता हैं.

स्टडी में क्या निकला
बायोइंक निर्मित स्किन में सेल्स 21 दिनों बाद भी जीवित थे ये स्किन सेल्स हिस्टोलॉजिकल (histological) रूप से आवश्यक विशेषताओं को बनाए रखने में सक्षम थे और इनमें एपिडर्मल-त्वचीय मार्करों (epidermal-dermal markers) के भी एक्सप्रेशन देखे गए है. इसके अलावा स्किन टिशू के बायो-फाइब्रिकेशन के लिए यूज किए जाने वाले हाइड्रोजेल में भी ब्लड के संपर्क में आने पर कोई एडवर्स रिएक्शन यानी प्रतिकूल प्रतिक्रिया नहीं देखी गई है.  जानकारी के अनुसार, 3डी प्रिंटेड स्किन के लिए कच्चा माल कम कीमत पर आसानी से उपलब्ध हैं. 3डी प्रिंटेड स्किन, बेसिक टिशू स्ट्रक्चर और उसकी कार्यक्षमता की नकल करने में सक्षम है. जिससे इस विधि को स्किन के बराबर सेल्स विकसित करने में यूज किया जा सकता है.

कैसे तैयार किया गया बायोइंक
बायोइंक तैयार करने के लिए, डायथाइलामिनोइथाइल सेलुलोज (Diethylaminoethyl cellulose) को पाउडर के रूप में एक स्थिर नेचुरल पॉलिमर (Stabilized Natural Polymers), एल्गिनेट (alginate) के घोल में फैलाया गया है. ये सॉल्यूशन सेल्स को एक दूसरे से जोड़ने वाले जिलेटिन घोल (gelatin solution) के साथ मिलाया गया है. बायोइंक का यूज रोगी के फाइब्रोब्लास्ट, एपिडर्मल केराटिनोसाइट्स और स्किन टिशू में पाए जाने वाले सेल्स को  (capsule) करने के लिए किया गया है.

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रिसर्चर्स ने स्किन के टिशू को परत दर परत बायोप्रिंट किया. इसके बेस्ड पर बायोइंक के कैप्सूलीकृत फाइब्रोब्लास्ट (fibroblast) को 6 लेयर में प्रिंटेड किया गया है और 3 स्टैक के रूप में व्यवस्थित किया गया है. इसके शीर्ष पर, उन्होंने बायोइंक-कैप्सूलीकृत केराटिनोसाइट्स (Bioink-capsulated keratinocytes) की दो लेयर्स के एक सिंगल स्टैक को बायोप्रिंट किया है. इस संरचना को एक उपयुक्त माध्यम में कल्चर किया गया है.

Tags: Health, Health News, Lifestyle





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