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6 लक्षण मल्टीपल मायलोमा होने के हैं संकेत, डॉक्टर से जानें ब्लड कैंसर के इस खतरनाक प्रकार के कारण, निदान, इलाज

6 लक्षण मल्टीपल मायलोमा होने के हैं संकेत, डॉक्टर से जानें ब्लड कैंसर के इस खतरनाक प्रकार के कारण, निदान, इलाज


हाइलाइट्स

मल्टीपल मायलोमा प्लाज़्मा कोशिकाओं का एक विकार है और प्लाज़्मा की कोशिकाओं में कैंसर हो जाता है.
मल्टीपल मायलोमा आमतौर पर बड़ी उम्र के व्यस्कों में पाया जाता है.

Multiple myeloma Symptoms and Causes: कैंसर का नाम सुनते ही लोगों में डर बैठ जाता है. कई तरह के कैंसर होते हैं, जिसमें ब्लड कैंसर भी बेहद खतरनाक होता है. मल्टीपल मायलोमा भी एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जिसमें प्लाज़्मा की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं. प्लाज़्मा कोशिकाएं, एक प्रकार की रक्त कोशिकाएं हैं, जो बोन मैरो में पाई जाती हैं. ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) का अभिन्न हिस्सा हैं. इनका काम है इन्फेक्शन से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज या इम्यूनोग्लोब्युलिन (immunoglobulins) बनाना. आइए जानते हैं मैक्स हॉस्पिटल (पटपड़गंज, नई दिल्ली) की सीनियर कंसलटेंट, हेमेटोलॉजी एंड हेमेटो-ऑन्कोलॉजी, बीएमटी डॉ. निवेदिता ढींगरा से मल्टीपल मायलोमा के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में विस्तार से.

मल्टीपल मायलोमा क्या है?

मल्टीपल मायलोमा प्लाज़्मा कोशिकाओं का एक विकार है. इसमें प्लाज़्मा की कोशिकाओं में कैंसर हो जाता है. वे सेहतमंद एंटीबॉडीज बनाने की बजाय कैंसर प्रोटीन बनाने लगती हैं, जिसे एम प्रोटीन या मोनोक्लोनल प्रोटीन या एम बैंड भी कहते हैं. एम प्रोटीन शरीर के विभिन्न अंगों जैसे हड्डियों, किडनी, बोन मैरो को प्रभावित करता है और मायलोमा के लक्षण पैदा करता है.

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मल्टीपल मायलोमा के लक्षण क्या हैं?

मल्टीपल मायलोमा आमतौर पर बड़ी उम्र के व्यस्कों में पाया जाता है. 40 से कम उम्र में इसके बहुत कम मामले ही देखने में आते हैं. इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • यह एम प्रोटीन द्वारा शरीर के मुख्य अंगों (end-organ damage) को नुकसान पहुंचाता है.
  •  बोन मैरो में प्लाज़्मा की कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने की वजह से बोन मैरो काम करना बंद कर देता है, जिससे मरीज़ को एनीमिया हो सकता है. कभी-कभी श्वेत रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की संख्या भी गिर जाती है.
  • मरीज़ को लगातार पीठ में दर्द या बिना कारण हड्डियों में फ्रैक्चर हो सकता है.
  •  इसकी वजह से रीनल फेलियर (किडनी खराब होना) भी हो सकता है, जिसे कास्ट नेफ्रोपैथी भी कहते हैं.
  • मायलोमा के मरीज़ों में कैल्शियम का स्तर बहुत अधिक होता है, जो न्यूरोलॉजिकल लक्षणों का कारण बन सकता है. इसके लिए जल्द से जल्द निदान और इलाज कराने की ज़रूरत होती है.
  • मल्टीपल मायलोमा के कारण मरीज की इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की क्षमता कमज़ोर हो जाती है और इन्फेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है.

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मायलोमा का निदान कैसे किया जाता है?

मल्टीपल मायलोमा का निदान कुछ बेसिक और कुछ आधुनिक रक्त जांच के द्वारा किया जाता है, जो आसानी से उपलब्ध है. इसमें कम्प्लीट ब्लड काउंट, लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट, एम प्रोटीन की पहचान के लिए सीरम प्रोटीन इलेक्ट्रोफोरेसिस के साथ इम्युनोफिक्सेशन किए जाते हैं. हालांकि, यह समझना ज़रूरी है कि कभी-कभी एम प्रोटीन की मौजूदगी को मायलोमा नहीं माना जाता, क्योंकि 50 की उम्र के बाद 5 फीसदी स्वस्थ लोगों में एम प्रोटीन बन सकता है, जो सिम्प्टोमेटिक मल्टीपल मायलोमा का कारण नहीं बनता.

मैरो में असामान्य प्लाज़्मा कोशिकाओं का पता लगाने के लिए डॉक्टर बोन मैरो की जांच भी करता है. इसके अलावा, मायलोमा की वजह से हड्डियों को नुकसान पहुंचा है या नहीं, इसकी जांच के लिए विभिन्न हड्डियों के रेडियोग्राफ या एक्सरे किए जाते हैं. आजकल मायलोमा की वजह से हड्डियों को हुए नुकसान की जांच के लिए पूरे शरीर का पैट-सीटी भी किया जाने लगा है. कुछ मामलों में प्लाज़्मा कोशिकाओं के सॉलिड मास-प्लाज़्मासाइटोमास (Plasmacytomas) की जांच की जाती है.

मायलोमा के इलाज के क्या विकल्प हैं?

मल्टीपल मायलोमा के इलाज के लिए साप्ताहिक रूप से दो या तीन दवाओं का संयोजन दिया जाता है. 65 साल के कम उम्र के मरीज जो चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ हैं और अच्छी स्थिति में हैं, उनमें 4-6 महीने तक कीमोथेरेपी देने के बाद ऑटोलोगस बोन मैरो ट्रांसप्लान्ट किया जा सकता है. विभिन्न मामलों में इलाज के लिए नई टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी दवाएं भी उपलब्ध हैं. मायलोमा के उपचार में आधुनिक प्रगति के साथ ऐसे सुरक्षित थेरेपीज भी उपलब्ध हैं, जिनके द्वारा मरीज लम्बे समय तक मायलोमा से मुक्त जीवन जी सकता है.

Tags: Cancer, Health, Lifestyle



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