स्वास्थ्य

यूरिक एसिड लेवल कम करने में हल्दी है बेहतरीन इलाज, जानें जोड़ों का दर्द मिटाने के लिए कैसे करें प्रयोग

यूरिक एसिड लेवल कम करने में हल्दी है बेहतरीन इलाज, जानें जोड़ों का दर्द मिटाने के लिए कैसे करें प्रयोग


नई दिल्ली. आजकल जोड़ों के दर्द की समस्या अधिकांश लोगों को सता रही है. वैज्ञानिक इसके पीछे यूरिक एसिड बढ़ना मुख्य वजह मानते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो शरीर में यूरिक एसिड लेवल को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है. यूरिक एसिड बढ़ने के कारण होने वाली सबसे खतरनाक समस्याओं में एक जोड़ों का दर्द है और यदि इस पर शुरू से ही काबू नहीं रखा गया तो समय के साथ समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि यूरिक एसिड बढ़ने से न केवल जोड़ों का दर्द बल्कि हड्डियों और जोड़ों से संबंधित अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी जन्म ले सकती हैं. इनमें गठिया, गाउट और ऑस्टियोपोरोसिस का भी जोखिम बढ़ सकता है. यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से आपको किडनी की पथरी (Kidney Stones) और मोटापे से संबंधित समस्याओं का सामना भी करना पड़ साता है, जिसे हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है.

क्या हैं इसके लक्षण?
यदि आपके जोड़ों में तेज दर्द हो रहा है तो इसे यूरिक एसिड बढ़ने का लक्षण माना जा सकता है. इससे जोड़ों में कठोरता और अकड़न हो सकती है. आपको जोड़ों को हिलाने-डुलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है. प्रभावित हिस्से में लाली और सूजन देखी जा सकती है और जोड़ों का आकार बिगड़ने लगता है. मेडिकल में हाई यूरिक एसिड लेवल को काबू करने के लिए कई तरह की दवाएं इलाज उपलब्ध हैं, हालांकि कुछ घरेलू उपायों के जरिए भी यूरिक एसिड, गाउट और जोड़ों के दर्द से राहत पाई जा सकती है.

हल्दी के प्रयोग से यूरिक एसिड लेवल होगा कम
स्वास्थ्य संबंधी विशेषज्ञ बताते हैं कि हल्दी शरीर में यूरिक एसिड लेवल को कम कर सकती है. हल्दी में आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं जो बीमारियों से लड़ने में बहुत फायदेमंद साबित होते हैं. हल्दी सेहत के लिए कई चमत्कारी फायदे देने वाली है.

हल्दी में करक्यूमिन सबसे सक्रिय घटक
हल्दी में करक्यूमिन सबसे सक्रिय घटक है. इसे एक पावरफुल एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व माना जाता है. आर्थराइटिस रिसर्च एंड थेरेपीट्रस्टेड सोर्स में 2019 के पशु अध्ययन के अनुसार, करक्यूमिन नुक्लेअर फैक्टर-कप्पा बी (एनएफ-कप्पा बी) नामक प्रोटीन को दबा सकता है. एनएफ-कप्पा बी गठिया सहित अन्य इंफ्लेमेटरी डिजीज का कारण बन सकता है.

NCBI की एक स्टडी के अनुसार, हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबायोटिक गुण होते हैं. हल्दी वाला दूध पीने से हाई यूरिक एसिड को कंट्रोल करने और ब्लड प्रेशर को मेंटेन करने में काफी मदद मिलती है. यह बैक्टीरिया को दूर रखकर पाचन तंत्र को भी स्वस्थ रखता है.

दूध में हल्दी डालकर पीने से पैरों की सूजन कम
दूध में हल्दी डालने से हाइपरयूरिसीमिया के कारण पैरों में होने वाली सूजन भी कम हो जाती है. बेहतर परिणाम के लिए आप हल्दी वाले दूध में एक चुटकी काली मिर्च भी मिला सकते हैं.



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