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भारत को क्‍यों डेल्‍टाक्रोन से डरने की जरूरत नहीं? ICMR विशेषज्ञ ने बताई वजह

भारत को क्‍यों डेल्‍टाक्रोन से डरने की जरूरत नहीं? ICMR विशेषज्ञ ने बताई वजह


नई दिल्‍ली. देश कोरोना के मामलों में कमी देखी जा रही है हालांकि विश्‍व के कई देशों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इन देशों में कोरोना के नए मामलों के पीछे ओमिक्रोन (Omicron) और डेल्‍टा वेरिएंट (Delta Variant) से मिलकर बने डेल्‍टाक्रोन वायरस (Deltacron Virus) को जिम्‍मेदार बताया जा रहा है. ऐसे में कोरोना की दूसरी लहर में डेल्‍टा वेरिएंट की तबाही देख चुके भारत के लोगों को भी चिंता सता रही है कि यह वेरिएंट कितना खतरनाक हो सकता है और यह भारत में आकर कितना नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकि डेल्‍टाक्रोन को लेकर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ अलग ही राय दे रहे हैं. आईसीएमआर (ICMR) से जुड़े स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ कह रहे हैं कि डेल्‍टाक्रोन से डरने की जरूरत नहीं है. संभव है कि यह ओमिक्रोन और डेल्‍टा से भी कमजोर वायरस साबित हो.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के नेशनल चेयर डॉ. सीजी पंडित न्‍यूज18 हिंदी से बातचीत में कहते हैं कि हाल ही में इन्‍साकॉग ने कहा कि उन्‍हें डेल्‍टा और ओमिक्रोन से मिलकर बने वेरिएंट डेल्‍टाक्रोन के कुछ संदिग्‍ध केसेज मिले हैं. हालांकि ये केसेज बहुत कम बताए जा रहे हैं. चूंकि डेल्‍टा वेरिएंट कोरोना की दूसरी लहर (Corona Second Wave) में तबाही मचा चुका है और तीसरी लहर में भारत ओमिक्रोन का बढ़ता संक्रमण भी देख चुका है. लिहाजा डेल्‍टाक्रोन को लेकर लोगों का भयभीत होना लाजिमी है लेकिन अगर वायरस के सिद्धांतों का अध्‍ययन करें और पुराने मामलों को देखें तो कोई भी रीकॉम्बिनेंट वायरस  स्‍थाई रूप से प्रभावी नहीं हो पाया है. यही वजह है कि नए रीकॉम्बिनेंट डेल्‍टाक्रोन को लेकर भी यह अनुमान है कि यह डेल्‍टा और ओमिक्रोन दोनों वेरिएंट से कमजोर हो सकता है.

डॉ. सीजी पंडित कहते हैं कि वायरसों के सामान्‍य सिद्धांतों में देखा गया है कि जब भी वायरस का रीकॉम्बिनेशन होता है या रीकॉम्बिनेंट वायरस (दो वायरस या वेरिएंट के मिलने से बना एक वायरस) सामने आता है तो वह अधिक समय तक स्‍थाई नहीं रहता. ऐसा वायरस जीवित तो रहता है लेकिन उस तरह नहीं रहता जैसे कि ओरिजिनल स्‍वरूप वाला कोई वायरस रहता है और नुकसान पहुंचाता है. रीकॉम्बिनेंट वायरस कमजोर रहता है. कई बार देखा गया है कि दो चीजों से मिलकर बना वायरस कपेटिबिलिटी या फिटनेस के अभाव में कुछ समय के बाद खुद ही खत्‍म हो जाता है. एचआईवी (HIV) के ही मामले में कई रीकॉम्बिनेंट वायरस देखे गए जो ज्‍यादा समय तक सर्वाइव नहीं कर पाए. ऐसे वायरस आने के बाद कुछ दिन रहे और फिर खत्‍म हो गए.

डॉ. पंडित कहते हैं कि कोरोना के वायरस में अब डेल्‍टाक्रोन सामने आया है. यह भी रीकॉम्बिनेंट वायरस ही है जो डेल्‍टा और ओमिक्रोन से मिलकर बना है. इसमें एक हिस्‍सा डेल्‍टा से आया है और दूसरा हिस्‍सा ओमिक्रोन से आया है. चूंकि रीकॉम्बिनेंट वायरस में स्‍पाइक प्रोटीन प्रमुख होता है तो देखा गया है कि डेल्‍टाक्रोन में स्‍पाइक प्रोटीन ओमिक्रोन से आया है और बाकी हिस्‍सा डेल्‍टा का है. लिहाजा ऐसी संभावना है कि ओमिक्रोन के स्‍वभाव के अनुसार यह रीकॉम्बिनेंट वायरस संक्रमण को बढ़ाने में जरूर कारगर रहे लेकिन कम खतरनाक रहे.

बाकी देशों में बढ़ रहे केसों का भारत पर असर
डॉ. सीजी कहते हैं कि फिलहाल जिन देशों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं उनमें जर्मनी, फ्रांस, साउथ कोरिया, हांगकांग आदि देश हैं. अब चूंकि इनमें वैक्‍सीन लगवाई जा चुकी है लेकिन वैक्‍सीन का जो सिद्धांत है वह यह है कि वह संक्रमण को नहीं रोक सकती है. अगर कोई भी नया वेरिएंट या रीकॉम्बिनेंट वायरस आता है तो लोग उसकी गिरफ्त में तो आएंगे लेकिन वैक्‍सीन के चलते अस्‍पताल जाने से बच जाएंगे. वैक्‍सीनेटेड लोगों को भी नया वायरस संक्रमित तो करेगा लेकिन मौत से बचाव हो जाएगा. अभी तक के आंकड़े भी यही कह रहे हैं कि भले ही इन देशों में कोरोना के केसज बहुत बड़ी संख्‍या में आ रहे हैं लेकिन मौतों का आंकड़ा कम है.

वहीं अपने देश भारत में ही देखें तो यहां भी वैक्‍सीन लगवाई गई है. ऐसे लोगों को डेल्‍टा भी हुआ और वैक्‍सीन भी लगी और फिर ओमिक्रोन की चपेट में भी आए लेकिन मरने से बच गए. इसलिए वैक्‍सीन लगी है या संक्रमण के बाद इम्‍यूनिटी बन गई है तो भी नए वेरिएंट से संक्रमण तो हो सकता है लेकिन मुख्‍य बात है कि उससे नुकसान कितना हो रहा है. ओमिक्रोन में देखा गया कि नया वेरिएंट होने के बावजूद नुकसान कम हुआ लेकिन इसका संक्रमण बहुत तीव्र था और उसके संक्रमण के बाद लोगों में हाइब्रिड इम्‍यूनिटी आ गई. लिहाजा इस स्थिति में भी डेल्‍टाक्रोन के असर को लेकर राहत महसूस ही जा सकती है.

वेरिएंट कैसा भी हो, लोगों को नहीं भूलनी चाहिए ये चीजें
डॉ. पंडित कहते हैं कि कोरोना वायरस को वैज्ञानिक तौर पर भले ही ओमिक्रोन, डेल्‍टा या डेल्‍टाक्रोन के रूप में परिभाषित करके इसके कम और ज्‍यादा प्रभाव को समझ लें लेकिन किसी भी आम आदमी को कोरोना वायरस से बचाव के लिए उपाय करने की जरूरत अभी भी है और तब तक है जब तक के कोरोना के मामले भारत में पूरी तरह थम नहीं जाते. भारत में अभी भी कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं, फिर चाहे कोई भी वेरिएंट क्‍यों न हो. ऐसे में जरूरी है कि लोग बिना इस बात पर ध्‍यान दिए कि कौन सा वेरिएंट ज्‍यादा या कम खतरनाक है, बचाव के तरीकों को अपनाते रहें. मास्‍क पहनें. बाहर निकलते समय दो गज की दूरी का ध्‍यान रखें. मास्‍क और हाथों को साफ रखने की प्रक्रिया को जीवन का अभिन्‍न हिस्‍सा बना लें. वैक्‍सीनेशन जरूर कराएं. ऐसा करने से कोरोना के किसी भी वेरिएंट के खतरे को कम किया जा सकता है.

Tags: Corona Virus, Delta, Omicron



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