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बॉडी में इंफ्लेमेशन पैदा करने वाले फूड कौन-कौन से हैं, एक्सपर्ट से जानें

बॉडी में इंफ्लेमेशन पैदा करने वाले फूड कौन-कौन से हैं, एक्सपर्ट से जानें


Foods that cause inflammation in the body : कई बार शरीर में चोट लगने या किसी तरह के इंफेक्शन होने की वजह से सूजन या इंफ्लेमेशन (Inflammation) की समस्या हो जाती है. जब किसी को इंफ्लेमेशन होता है, तो जोड़ों या शरीर में जिस जगह भी चोट लगी हो, वहां दर्द और त्वचा का लाल होने जैसी समस्या दिख सकती है. कई बार आपको ठंड लगना, बुखार, शरीर में एनर्जी लेवल की कमी, सिरदर्द, खाने की इच्छा में कमी, मांसपेशियों का सख्त होना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. कई बार इंफ्लेमेशन की समस्या बिना किसी माइक्रोब (Microbe) के हमले के भी बढ़ जाती है. ऐसे में सूजन की समस्या शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकती है. कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज, अर्थराइटिस, डिप्रेशन, अल्जाइमर सहित कई प्रमुख बीमारियां क्रॉनिक इंफ्लेमेशन से संबंधित होती हैं.

आप भी सूजन, जलन की समस्या से परेशान रहते हैं, तो आपके लिए ये जानने बेहद जरूरी है कि आखिर खाने की कौन-कौन सी ऐसी चीजें हैं, जो शरीर में इंफ्लेमेशन को बढ़ाती हैं? हमने इस बारे में विस्तार से बताने के लिए सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी (Nutritionist Divya Gandhi)  से बात की.

साउथ इंडियन फूड
हमारे शरीर में इंफ्लेमेशन वो खाद्य पदार्थ करते हैं, जो पानी को सोखते हैं, जैसे कि हमारे साउथ इंडियन फूड. ये हमारी बॉडी को इंफ्लेमेट कर देते है, इसलिए जब भी हम साउथ इंडियन खाएं, तो उसके साथ वो फूड खाएं एंटीइंफ्लेमेट्री होते हैं.

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मीठी चीजें
मीठी चीजें भी हमारे शरीर में इंफ्लेमेशन को बढ़ाती है. जैसे मीठे सिरप, शरबत , चॉकलेट, केक, पेस्ट्री, स्क्वैश, ऐसे कई चीजें जिनके पैकेट पर ट्रांस फैट लिखा होता है. वो हमारी बॉडी को इंफ्लेमेट करती हैं.

ऑयल कैप्सूल
बहुत से लोग ऑयल के लिए ओमेगा-3 के कैप्सूल लेते हैं, फिश ऑयल कैप्सूल लेते हैं. अगर हमारी बॉडी में इन चीजों की मात्रा बिल्कुल उपयुक्त है, लेकिन हम इन्हें फिर भी ले रहे हैं. तो ये भी हमारी बॉडी को इंफ्लेमेट कर देते हैं.

रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट 
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (refined carbohydrates) में ऐसी चीजें आती हैं, जिसमें फाइबर नहीं है, वो चीजें जो मैदा से बनी हैं, जैसे ब्रेड, पास्ता, पिज्जा आदि हमारी बॉडी में इंफ्लेमेशन को बढ़ाती हैं.

ज्यादा शराब का सेवन
अगर आप ज्यादा एल्कोहल का सेवन करते हैं, तो वो भी शरीर में पानी को सोखती है, प्यास ज्यादा लगती है. और इससे लीकी गट (leaky gut) यानी छिद्रयुक्त आंत होने के चांस भी हो जाते हैं.

प्रोसेस्ड मीट, पैक्ड फूड
प्रोसेस्ड मीट, जैसे सॉसेज, सलामी आदि में कुछ ऐसे प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, जिससे की सूजन हो जाती है. इसमें हम चाइनीज फूड और पैक्ड फूड, रेडी टू ईट फूड को भी शामिल कर सकते हैं. इनमें हाई सोडियम लेवल होता है.

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अचार और तेज मसाले
अचार से भी बॉडी में इंफ्लेमेशन बढ़ जाता है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक मात्रा में नमक होता है. इसके अलावा अगर बहुत अधिक मात्रा में मसालों का सेवन करते हैं, उससे भी इंफ्लेमेशन होने का रिस्क रहता है.

दूध
कई बार ये देखने में आया है कि कुछ लोगों को दूध पीने के बाद सूजन का सामना करना पड़ता है. ऐसे लोगों को सोया मिल्क या बादाम का दूध पीना चाहिए.

रात के समय इन चीजों से बचें
रात के समय हमें दही और सिट्रिक चीजें जैसे संतरा, नींबू ये सब चीजें नहीं लेनी चाहिए. इससे वाटर रिटेंशन होती है, आप अगले दिन देखेंगे तो आपकी आंखें सूजी होंगी या आपके हाथ सूजे होंगे.

इंफ्लेमेशन के लक्षण
दो प्रकार के इंफ्लेमेशन होते हैं, एक्यूट इंफ्लेमेशन और क्रोनिक इंफ्लेमेशन. किसी भी तरह के चोट, इंफेक्शन के कारण एक्यूट इंफ्लेमेशन होता है. वहीं, क्रोनिक इंफ्लेमेशन टाइप 1 डायबिटीज, ल्युपस, रूमटॉएड अर्थराइटिस, अल्सरेटिव कोलाइटिस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसे रोगों के होने पर बढ़ जाता है. एक्यूट इंफ्लेमेशन में रेडनेस, दर्द, सूजन और क्रोनिक इंफ्लेमेशन में थकान, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कब्ज, डायरिया, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से संबंधित समस्याएं, सिरदर्द, त्वचा पर रैशेज, वजन बढ़ने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. एक्यूट इंफ्लेमेशन के विपरीत, क्रोनिक इंफ्लेमेशन के लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं या समय के साथ आते-जाते रहते हैं.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle



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