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दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र और मजबूत होगा, अब ऐसे रखी जाएगी नजर

दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र और मजबूत होगा, अब ऐसे रखी जाएगी नजर


नई दिल्ली. केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण (Pollution in Delhi- NCR) पर नजर रखने के लिए निगरानी केंद्रों (Monitoring Centers) में और इजाफा पर जोर दिया है. खासतौर पर राजधानी में वायु की गुणवत्ता को सुधारने के लिए निगरानी केंद्रों के नेटवर्क तो और मजबूत किया जाएगा. फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में वायु की गुणवत्ता मापने के लिए 146 निगरानी केंद्र हैं. अगर बात दिल्ली की करें तो यहां पर वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र की संख्या ठीक है, लेकिन इसकी गुणवत्ता बढ़ाए जाने की जरूरत है. इसके साथ ही आयोग ने दिल्ली से सटे राज्यों के जिलों में दो से तीन निगरानी तंत्र स्थापित करने पर जोर दिया है.

आपको बता दें कि सितंबर से लेकर दिसंबर महीने तक दिल्ली-एनसीआर में वायु की गुणवत्ता बेहत खराब हो जाती है. इसको ध्यान में रखते हुए एनडीएमसी अब विशेष कार्ययोजना बनाएगा. आईआईटी दिल्ली के दिशा-निर्देश पर यह कार्ययोजना तैयार किया जाएगा. इस कार्ययोजना में लुटियन दिल्ली क्षेत्र में वाहनों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे. एनडीएमसी परिषद की बैठक में बुधवार को इसको लेकर बड़ा फैसला हुआ है.

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दिल्ली- एनसीआर क्षेत्र में 146 निगरानी केंद्र हैं. इसमें 65 मैन्युअल और 81 रीयल टाइम केंद्र हैं.

वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र और मजबूत होगा
दिल्ली- एनसीआर क्षेत्र में 146 निगरानी केंद्र हैं. इसमें 65 मैन्युअल और 81 रीयल टाइम केंद्र हैं. इसमें 50 निगरानी केंद्र अकेले सिर्फ दिल्ली में हैं. गुरुग्राम में 11, गाजियाबाद में 8, गौतमबुद्धनगर में 12 फरीदाबाद में 5 और बागपत में 4 केंद्र हैं. इसके साथ ही दिल्ली से सटे झज्जर, सोनीपत, रोहतक में तीन-तीन केंद्र हैं. बुलंदशहर, भिवाणी, भपतपुर, चरखी दादरी, मेवात औऱ पलवल जिले में एक-एक केंद्र हैं.

आयोग ने क्या सिफारिश की है
आयोग का कहना है कि ज्यादातर निगरानी केंद्र शहरी इलाके में है, इसलिए पूरी जानकारी प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में अब पूरे क्षेत्र में वायु की गुणवत्ता निगरानी का नेटवर्क बढ़ाए जाने की जरूरत है. हालांकि, आय़ोग का मानना है कि दिल्ली में पर्याप्त संख्या में निगरानी केंद्र हैं, लेकिन इन केंद्रों पर अब इनकी गुणवत्ता बढ़ाए जाने की जरूरत है. इससे वायु की गुणवत्ता की भविष्यवाणी करना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा.

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आयोग का मानान है कि दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों पर नियंत्रण करने की आवश्यकता है. विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधयां एनसीआर में वायु प्रदूषण में प्रमुख रूप से योगदान देती हैं. समय-समय पर वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और वायु गुणवत्ता में महत्‍वपूर्ण सुधार के आधार पर निर्णय की समीक्षा की जाएगी.

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