स्वास्थ्य

दिन में झपकी लेना हो सकता है अल्जाइमर का शुरुआती संकेत- स्टडी

दिन में झपकी लेना हो सकता है अल्जाइमर का शुरुआती संकेत- स्टडी


Symptoms of Alzheimer’s: दिन के समय में यदि ज्यादा झपकी आ रही हो तो सावधान होने की जरूरत है. ब्रिंघम एंड वुमेन हॉस्पिटल (Brigham and Women’s Hospital) के रिसर्चर्स ने पाया है कि दिन के समय में यदि झपकी लेना बढ़ रहा हो तो ये भविष्य में अल्जाइमर डिमेंशिया (Alzheimer’s dementia) होने के खतरे का संकेत हो सकता है. साथ ही ये भी बताया कि गया है कि डिमेंशिया से दिन में झपकी भी बढ़ती है. ब्रिंघम में डिविजन ऑफ स्लीप एंड सक्रैंडियन (Division of Sleep and Sacrandian) डिसऑर्डर के मेडिकल बायोडायनॉमिक्स प्रोग्राम की रिसर्चर पेंग ली (Peng Li) ने बताया कि बुजुर्गों के दिन में सोने की आदत को लोग नजरअंदाज कर देते हैं.

पेंग ली ने बताया कि हमारी स्टडी का निष्कर्ष न सिर्फ ये बताता है कि दिन में झपकी लेना अल्जाइमर डिमेंशिया के बढ़ते खतरे का संकेत है, बल्कि समय के साथ इसमें बढ़ोतरी से स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं भी गहराती हैं. इसलिए 24 घंटे में सोने की आदत पर ध्यान देना स्वास्थ्य की निगरानी के लिए बहुत जरूरी है.  इस स्टडी का निष्कर्ष ‘अल्जाइमर्स एंड डिमेंशिया : द जर्नल ऑफ द अल्जाइमर एसोसिशन’ में प्रकाशित किया गया है. आपको बता दें कि दिन में झपकी लेने का बुजुर्गों की मैमोरी पावर (memory power) पर पड़ने वाले असर को लेकर विरोधाभासी निष्कर्ष मिलते रहे हैं.

पहले की स्टडी में क्या निकला
कुछ स्टडीज में बताया गया है कि दिन में झपकी लेने का संज्ञानात्मक प्रदर्शन, मूड और सतर्कता पर सकारात्मक असर होता है. जबकि कुछ अन्य स्टडीज में संज्ञानात्मक प्रदर्शन (cognitive performance) पर नकारात्मक असर की बात बताई गई है. लेकिन ब्रिंघम के रिसर्चरस ने पाया है कि पहले की स्टडीज में एक बार के व्यक्तिपरक सवालों के जवाबों में निष्कर्ष निकाले गए हैं. इसलिए उन्होंने दिन में झपकी लेने और अल्जाइमर डिमेंशिया के जोखिम को लेकर वस्तुनिष्ठ आकलन किया.

कैसे हुई स्टडी
स्टडी के लिए 1000 से ज्यादा लोगों के डाटा जुटाए गए. इनकी औसत उम्र 81 वर्ष थी. उन्हें 14 दिनों तक एक स्पेशल इंस्ट्रूमेंट पहनाया गया, जिससे झपकी लेने, उसकी फ्रिक्वेंसी और समय के बारे में जानकारी जुटाई गई. इसमें पाया गया कि झपकी लेने का समय और उसकी फ्रिक्वेंसी का संबंध अल्जाइमर डिमेंशिया से होता है और दिन के मामले में यह ज्यादा होता है. जबकि डिमेंशिया के स्वतंत्र कारकों के रूप में उम्र और रात में बार-बार नींद टूटना भी शामिल है.

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रिसर्चर्स के अनुसार, साल दर साल झपकी लेने का समय और उसकी फ्रिक्वेंसी बढ़ना अल्जाइमर डिमेंशिया की गति को भी तेज करता है. पेंग ली ने बताया कि हमने पाया है कि दिन में सोने और अल्जाइमर रोग के इस दुष्चक्र (vicious circle) से बीमारी के बढ़ने में नींद की भूमिका को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.

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हालांकि, रिसर्चर्स ने इस स्टडी की तीन सीमाओं को भी स्वीकारा है. पहला ये कि नींद की आदत के आकलन के लिए स्टैंडर्ड मेथड वाले डाटा का संकलन नहीं किया गया है. दूसरा, ये कि इस स्टडी में शामिल लोग बुजुर्ग थे, इसलिए जो निष्कर्ष निकाले गए हैं, जरूरी नहीं कि वे युवा आबादी पर भी उसी रूप में लागू हो. तीसरा ये कि भविष्य की स्टडी में सीधे तौर पर दिन में ली जाने वाली झपकी के आधार पर संज्ञानात्मक ह्रास (cognitive decline) की जांच की जानी चाहिए.

Tags: Health, Health News, Lifestyle



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