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ज्यादा दिनों तक जिंदा रह सकते हैं कम सीटीसी वाले मुंह के कैंसर के मरीज – स्टडी

ज्यादा दिनों तक जिंदा रह सकते हैं कम सीटीसी वाले मुंह के कैंसर के मरीज - स्टडी


Oral Cancer Patients With Less CTC Live Longer : इंडियन रिसर्चर्स की एक टीम की तरफ से की गई एक स्टडी में पाया गया है कि मुंह के कैंसर के जिन मरीजों के खून में सर्कुलेंटिग ट्यूमर सेल (सीटीसी) की संख्या कम होती है, वे ज्यादा संख्या वालों के मुकाबले अधिक दिनों तक जिंदा रह सकते हैं. आपको बता दें कि मुंह में लंबे समय से कोई छाला ठीक नहीं हो रहा है, होंठ, मसूडों, गाल के अंदरूनी हिस्‍से में धब्‍बे या घाव हैं, मुंह में अकारण दर्द रहता है, मुंह में सफेद या लाल धब्‍बेदार पैच हैं और उनसे लगातार खून आता है, चेहरे का कोई हिस्‍सा अचानक सून्‍य हो जाता है और गले में दर्द रहता है, बोलने, खाना चबाने या निगलने में दिक्‍कत होती है या अचानक आवाज बदल गई है, तो ये सभी मुंह के कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. हिंदुस्तान टाइम्स में छपी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, इस स्टडी का नेतृत्व टाटा मेमोरियल अस्पताल (Tata Memorial Hospital) मुंबई के डॉ. पंकज चतुर्वेदी, डॉ. जयंत खंडारे और पुणे स्थित एक्टोरियस ओंकोडिस्कवर टेक्नोलॉजी (Actorius OncoDiscover Technology) की एक टीम ने किया.

इस स्टडी का निष्कर्ष ‘इंटनेशनल पीयर रिव्यू जर्नल ट्रिपल ओ (international peer-reviewed Journal Triple O)’ में प्रकाशित किया गया है. चार सालों तक चले सिर व गर्दन के कैंसर के सबसे बड़े क्लीनिकल ट्रायल के दौरान 500 मरीजों का विश्लेषण किया गया.

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क्या कहते हैं जानकार
डॉ. जयंत खंडारे ने बताया कि एक साथ मुंह के कैंसर के 152 मरीजों का विश्लेषण किया गया और सीटीसी की उपस्थिति की जानकारी के लिए प्रति मरीज 1.5 एमएल (मिलीमीटर) खून की निगरानी की गई. स्टडी के दौरान पता चला कि जिन मरीजों के 1.5 एमएल खून में 20 से ज्यादा सीटीसी की मौजूदगी थी, उनमें रोग के एडवांस स्टेज में होने और नोडल मेटास्टेसिस (पहली बार जहां कैंसर कोशिकाओं का निर्माण हुआ था, वहां से विखंडित होना) की आशंका अधिक थी.

दूसरी तरफ 1.5 एमएल खून में 12 सीटीसी से कम वाले मरीजों की अधिक दिनों तक जिंदा रहने की संभावना ज्यादा थी. सीटीसी वे कैंसर सेल्स होती हैं, प्राथमिक ट्यूमर को हटाकर ब्लड में घुल जाती है. नेशनल कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार देश में कैंसर के 14 लाख से ज्यादा मरीज हैं.

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डॉ. खंडारे ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में महाराष्ट्र में कैंसर के मामलों और मौतों में क्रमशः 11,306 और 5,727 की वृद्धि हुई है, जो लगभग आठ प्रतिशत की सामूहिक वृद्धि है. उन्होंने आगे कहा कि परीक्षण का उपयोग सिर और गर्दन, स्तन, फेफड़े, कोलोन और रेक्टल जैसे कैंसर के निदान के लिए सीटीसी का पता लगाने के लिए किया जाता है.

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