स्वास्थ्य

किडनी डोनेट करने के बाद क्या आ सकती हैं दिक्कतें? लालू यादव की बेटी रोहिणी को रखनी होगी ये सावधानी

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नई दिल्‍ली. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव का सोमवार को सफल किडनी ट्रांसप्‍लांट किया गया है. लालू यादव को उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने एक किडनी डोनेट की है. रोहिणी अब अपना आगे का जीवन एक किडनी के सहारे जीएंगी. शरीर का महत्वपूर्ण अंग होने के कारण दो में से एक गुर्दा दान करने के बाद आगे के जीवन को लेकर लोगों के मन में तमाम शंकाएं होती हैं. आमतौर पर ऐसे कई सवाल उठते हैं कि एक किडनी के सहारे व्‍यक्ति कितने दिन जिंदा रह पाएगा?

क्‍या एक किडनी वाले को स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी गंभीर समस्‍याएं हो सकती हैं? क्‍या शरीर से किडनी निकाले जाने के बाद शरीर कमजोर पड़ जाता है? किडनी दान करने के कितने साल बाद लोगों को शारीरिक दिक्‍कत आने लगती है? इन्‍हीं डर और शंकाओं के चलते गुर्दा दान करने के लिए भी सभी तैयार नहीं होते हैं. हालांकि स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों की राय मानें तो ये शंकाएं निराधार हैं. दिल्‍ली के इंद्रप्रस्‍थ अपोलो अस्‍पताल में डिपार्टमेंट ऑफ नेफ्रॉलॉजी के एचओडी और किडनी ट्रांसप्‍लांट सर्जन प्रोफेसर अमित गुप्‍ता ने न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में कई सवालों के जवाब दिए हैं. उनका कहना है कि किडनी दान करना किसी भी लिहाज से डोनर के लिए नुकसानदेह नहीं है. हालांकि कुछ सावधानियां जरूर बरतनी होती हैं.

  • क्‍या किडनी दान करने से डोनर को कोई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍या हो सकती है?

    व्‍यक्ति के पास दो किडनी होती हैं जो शरीर के महत्‍वपूर्ण अंग के रूप में काम करती हैं. अगर ये खराब हो जाएं तो व्‍यक्ति का बचना मुश्किल होता है. हालांकि एक बेहतर चीज ये हैं कि अगर किसी की किडनी खराब हो जाएं तो किसी अन्‍य व्‍यक्ति की एक किडनी निकालकर दूसरे व्‍यक्ति के अंदर प्रत्‍यारोपित या ट्रांसप्‍लांट की जा सकती है. जिससे उस व्‍यक्ति को जीवनदान मिल जाता है. जहां तक किडनी दान करने की बात है तो डोनर को किडनी दान करने से कोई खास परेशानी नहीं होती. दुनिया में बहुत सारे ऐसे लोग भी पैदा होते हैं जिनकी जन्‍म से एक ही किडनी होती है और वे अपना पूरा जीवन अच्‍छे ढंग से गुजारते हैं.

  • क्‍या डोनर के शरीर से एक किडनी निकलने के बाद शरीर कमजोर हो जाता है?

    अगर शरीर से एक अंग निकलता है तो जाहिर है कि कुछ बदलाव तो होते हैं. लेकिन इससे जटिल स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी दिक्‍कतें पैदा हो जाएं, ऐसा नहीं होता है. कई रिसर्च और अभी तक जो भी मामले सामने आए हैं उनमें देखा गया है कि एक किडनी निकलने के बाद डोनर के शरीर में 30-40 साल के बाद स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी दिक्‍कतें पैदा होती हैं. उससे पहले तक वह आसानी से जीवन जीता है. इससे शरीर कमजोर होने जैसी कोई बात नहीं है. व्‍यक्ति पहले की तरह ही बेहतर जीवन जी सकता है. सिर्फ इतना होता है कि पहले जो भार दोनों किडनियों पर था, वह अब एक पर आ जाता है. हालांकि एक किडनी भी पूरी तरह उस स्थिति को संभाल लेती है.

  • डोनर को क्‍या सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है?

    किडनी दान करने वाले व्‍यक्ति को डॉ. हर साल शरीर के सभी चेकअप कराने के लिए कहते हैं. साथ ही ब्‍लड प्रेशर को नियंत्रित करने की सलाह देते हैं. किडनी दान करने के बाद जरूरी है कि डोनर अपने बीपी को सही रखे. पानी ज्‍यादा पीए. यूरिन संबंधी कोई परेशानी न हो, इसका ध्‍यान रखे. अगर बीपी बढ़ने लगे तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें. इसके अलावा यूरिन में जलन आदि हो तो भी चिकित्‍सकीय सलाह लें.

  • क्‍या कोई भी व्‍यक्ति किडनी दे सकता है?

    कोई भी पूरी तरह स्‍वस्‍थ्‍य व्‍यक्ति ही किडनी दे सकता है. किसी भी प्रकार से अस्‍वस्‍थ या जिसकी किडनी में पहले से कोई समस्‍या है, ऐसे व्‍यक्ति से किडनी नहीं ली जाती. किडनी ट्रांसप्‍लांट से पहले स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ किडनी डोनेट करने वाले व्‍यक्ति की पूरी जांच करते हैं. बीपी नॉर्मल होने के साथ ही उसके हर प्रकार से स्‍वस्‍थ पाए जाने के बाद ही किडनी निकालने का फैसला किया जाता है. यह भी देखा जाता है कि अगर वह व्‍यक्ति एक किडनी पर रहेगी तो उसे आगे कोई समस्‍या न हो. ऐसे में डोनर को परेशानी की संभावना कम रहती है.

  • जिनके जन्‍म से एक किडनी होती है या जो एक डोनेट कर देते हैं, उनके जीवन में कोई खास अंतर होता है

    कुछ लोगों को जन्म से एक ही किडनी होती है. कई बार इंफेक्शन, कैंसर और डोनेशन के बाद एक किडनी पर लोगों को जिंदा रहना पड़ता है. या फिर कुछ लोग अपनी एक किडनी डोनेट कर देते हैं. हालांकि ऐसे लोग भी सामान्‍य जीवन जी सकते हैं. कई बार लोगों को लंबा जीवन गुजर जाने के बाद जांच में पता चलता है कि उन्‍हें एक ही किडनी है. इससे उनके जीवन में अंतर नहीं आता है.

  • एक किडनी वाले को खानपान में क्‍या सावधानी बरतनी चाहिए?

    एक किडनी पर जीवन जी रहे व्‍यक्ति को नमक कम से कम खाना चाहिए. बीपी और शुगर नियंत्रित रखने चाहिए. बीपी की जांच कराते रहें. बहुत तला, भुना, जंक फूड आदि के बजाय सुपाच्‍य और पोषणयुक्‍त खाना खाएं. पानी ज्‍यादा मात्रा में पीएं. योग और व्‍यायाम करें.

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    FIRST PUBLISHED : December 06, 2022, 13:53 IST



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