स्वास्थ्य

एंग्‍जाइटी को नेचुरल तरीके से कम करने के लिए अपनाएं ये टिप्‍स

एंग्‍जाइटी को नेचुरल तरीके से कम करने के लिए अपनाएं ये टिप्‍स


हाइलाइट्स

एंग्‍जाइटी को कम करने के लिए रहे हमेशा एक्टिव.
एंग्‍जाइटी होने पर सिगरेट और शराब से बनाएं दूरी.
एंग्‍जाइटी में मेडिकेशन के साथ अपनाएं प्राकृतिक तरीके.

Natural Ways To Reduce Anxiety – कुछ चिंताएं लाइफ का हिस्‍सा होती हैं हालांकि सभी तरह की चिंताएं यानी एंग्‍जाइटी स्‍ट्रेसफुल नहीं होती. कई बार चिंता होने से व्‍यक्ति अधिक सतर्क और मजबूत बनता है लेकिन यदि ये चिंताएं लाइफ और हेल्‍थ को प्रभावित करने लगे तो इन्‍हें कम करना बेहद जरूरी होता है. चिंता शरीर में होने वाले तनाव के प्रति स्‍वाभाविक प्रतिक्रिया है. एंग्‍जाइटी होने पर व्‍यक्ति के शरीर में कई बदलाव आ सकते हैं जैसे- तेज हार्ट बीट, तेजी से सांस लेना, बेचैनी, ध्‍यान केंद्रित करने में परेशानी आदि. हालांकि एंग्‍जाइटी अलग-अलग लोगों में अलग-अलग तरीके से उभर सकती है. अधिक एंग्‍जाइटी होने पर पैनिक अटैक भी आ सकता है. इसलिए समय रहते एंग्‍जाइटी को कम करना बेहद जरूरी है. चलिए जानते हैं एंग्‍जाइटी को कम करने के लिए कौन से नेचुरल तरीके अपनाए जा सकते हैं.

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हमेशा रहें एक्टिव
नियमित एक्‍सरसाइज करना केवल फिजिकल हेल्‍थ के लिए ही नहीं बल्कि मेंटल हेल्‍थ के लिए भी जरूरी है. हेल्‍थलाइन के अनुसार तनाव कई कारणों से हो सकता है. लेकिन एक्‍सरसाइज व्‍यक्ति का ध्‍यान उन चीजों से हटा सकती है जो चिंता का कारण हैं. नियमित एक्‍सरसाइज करने या एक्टिव रहने से हार्ट बीट को बढ़ाने में मदद मिलती है जो ब्रेन फंक्‍शन को मजबूत बना सकता है.

स्‍मोकिंग को कहें ना
कई लोगों का मानना है कि स्‍मोकिंग करने से तनाव को कम करने में मदद मिलती है. तनावग्रस्‍त होने पर सिगरेट पीना तनाव को कम करने की बजाय बढ़ा सकता है. सिगरेट के धुएं में निकोटीन और अन्‍य केमिकल्‍स होते हैं जो ब्रेन के फंक्‍शन को बिगाड़ सकता है. इसलिए एंग्‍जाइटी को कम करने के लिए सिगरेट को पूरी तरह से बंद कर दें.

बैलेंस्‍ड डाइट लें
लो ब्‍लड शुगर लेवल, डिहाइड्रेशन, प्रोसेस्‍ड फूड और जंक फूड का अधिक सेवन करने से मूड स्विंग की समस्‍या हो सकती है. यदि खाने के बाद चिंता बढ़ जाती है तो अपनी खाने की आदतों में बदलाव करें. हाइड्रेटेड रहें, कार्ब्‍स का सेवन कम करें और फल, सब्जियों और प्रोटीन का अधिक सेवन करें.

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गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस करें
एंग्‍जाइटी होने पर कई लोगों की सांसें तेज चलने लगती हैं. इससे दिल की धड़कन तेज हो सकती है, चक्‍कर और पैनिक अटैक भी आ सकता है. ऐसे में जरूरी है कि सांस से संबंधित एक्‍सरसाइज का अभ्‍यास किया जाए. गहरी सांस लेने से सांसों को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
एंग्‍जाइटी होना एक सामान्‍य स्थिति है लेकिन एंग्‍जाइटी को हेल्‍थ पर प्रभाव नहीं डालने देना चाहिए. अधिक एंग्‍जाइटी होने पर डॉक्‍टर से सलाह ली जा सकती है.

Tags: Health, Lifestyle



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