स्वास्थ्य

आपके व्‍यवहार में बदलाव कहीं नर्वस ब्रेकडाउन तो नहीं, जानें क्‍या है ये बीमारी

How to deal with loneliness and emotional breakdown mental health in hindi pra


नई दिल्‍ली. भागदौड़ भरी जिंदगी और अस्‍त-व्‍यस्‍त लाइफस्‍टाइल ने लोगों को कई तरह की बीमारियां दी हैं. जिनमें मानसिक और शारीरिक दोनों ही प्रकार की बीमारियां शामिल हो सकती हैं. हालांकि कई बार ऐसा भी होता है कि लोग कई तरह की परेशानियों से घिरे रहते हैं लेकिन उन्‍हें इसका आभास ही नहीं होता. उनका व्‍यवहार दिन- प्रतिदिन बदलता रहता है लेकिन इसे वे परिस्थिति या दुख के कारण पैदा हुई स्थिति मान लेते हैं जबकि सच्‍चाई कुछ और होती है. ऐसी ही एक अवस्‍था है नर्वस ब्रेकडाउन (Nervous Breakdown). जिसमें व्‍यक्ति के व्‍यवहार में बदलाव होता रहता है लेकिन वह इसे पहचान नहीं पाता. चिकित्‍सकीय भाषा में समझें तो नर्वस ब्रेकडाउन शब्‍द अवसाद की ही एक स्थिति है.

दिल्‍ली स्थित इंस्‍टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज में प्रोफेसर साइकेट्री डॉ. ओमप्रकाश कहते हैं कि साइकोलॉजी की भाषा में नर्वस ब्रेकडाउन कोई बीमारी या शब्‍द नहीं है लेकिन आमतौर पर जब भी किसी मरीज को एक्‍यूट स्‍ट्रेस या गहरे अवसाद की स्थिति में देखते हैं तो नर्वस ब्रेकडाउन बोल दिया जाता है. जबकि असल में यह एक्‍यूट स्‍ट्रेड डिसऑर्डर या रिएक्‍शन होता है. कुछ समय के लिए स्‍ट्रेस या तनाव का स्‍तर इतना बढ़ जाता है कि व्‍यक्ति अवसाद की स्थिति में पहुंच जाता है और अपना मानसिक संतुलन भी खो देता है. इससे उबरने में कई बार चिकित्‍सकों की मदद लेनी पड़ती है.

क्‍या है नर्वस ब्रेकडाउन या एक्‍यूट स्‍ट्रेस रिएक्‍शन
डॉ. ओमप्रकाश कहते हैं कि जब भी कोई व्‍यक्ति किसी खास प्रकार के दुख या परेशानी से जूझ रहा होता है या उससे गुजर रहा होता है तो ऐसी स्थिति बन जाती है कि वह तनाव के भारी दवाब में आ जाता है या अवसाद में पहुंच जाता है. किसी अपने को खोने, परीक्षाओं में फेल होने, नौकरी गंवाने, किसी बीमारी से पीड़‍ित होने, तलाक या ब्रेकअप जैसी स्थिति से गुजरने पर गहरे दुख और तनाव का अनुभव करने के कारण एक्‍यूट स्‍ट्रेस डिसऑर्डर की स्थिति बन सकती है. कभी-कभी यह स्थिति इतनी बढ़ सकती है कि व्‍यक्ति गहरे अवसाद में लंबे समय तक रह सकता है. यह अचानक भी हो सकता है और धीरे-धीरे भी हो सकता है.

ये हो सकते हैं लक्षण
. मूड स्विंग या मूड में बार-बार बदलाव होना. जल्‍दी से गुस्‍सा आना या जल्‍दी ही दुखी हो जाना.
. मन में आत्‍महत्‍या का विचार आना इसका सामान्‍य लक्षण है.
. गहरे अवसाद की स्थिति रहती है. मानसिक रोगी जैसा महसूस हो सकता है. या किसी से बात करने का मन न करना.
. बहुत ज्‍यादा थकान और तनाव रहना या कुछ काम करते हुए जल्‍दी ही थक जाना.
. अच्‍छी नींद न आना या पूरी रात नींद न आना. जागते रहना और सोचते रहना.
. किसी भी काम में मन न लगना. फिर चाहे सेक्‍स लाइफ हो या जीवन की अन्‍य कोई गतिविधि.
. एकाग्रता का अभाव होना. खुद को स्थिर न कर पाना.
. पेट खराब रहना, खुद को बेचारा जैसा महसूस करना. शरीर या मांसपेशियों में दर्द और खिंचाव रहना.
. अकेले होने पर रोना, समाज और परिवार से कटा हुआ रहना. बिना बात नाराज होना.
. कभी-कभी पैनिक अटैक जैसा महसूस करना. घबराहट और बेचैनी होना.

लक्षणों को पहचान कर करें ये उपाय 
डॉ. कहते हैं कि किसी व्‍यक्ति को अपने अंदर या किसी परिजन के अंदर इस प्रकार के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत किसी मनोचिकित्‍सक से संपर्क करें. इसके साथ ही खाने-पीने का विशेष ध्‍यान रखें. पोषण युक्‍त भोजन करें. के अलावा योग और प्राणायाम के माध्‍यम से खुद को अवसाद मुक्‍त रखने की कोशिश भी कर सकते हैं. लोगों से मेल-जोल रखें. अगर किसी प्रकार का दुख या परेशानी है तो कोशिश करें कि किसी अपने से उस दुख या परेशानी को बांटें. समाज से कटने के बजाय लोगों से मिलन-जुलना शुरू करें.

Tags: Mental diseases, Mental health, Mental Health Awareness



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