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Wheat arrival in Mandis is less, huge cut in procurement targets | सरकारों की गेहूं खरीद रणनीति में आमूल चूल बदलाव, खरीद लक्ष्य में भारी कटौती, पंजाब में 5 मई से गेहूं खरीद बंद, योगी सरकार खेतों से खरीदेगी गेहूं

पंजाब और हरियाणा को छोड़ दें तो इस बार अन्य प्रदेशों में एमएसपी पर खरीद बहुत कम हुई है। इन दिनों एमएसपी का बाजार भाव एमएसपी से काफी कम है, इसलिए किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर मंडी में नहीं आ रहे हैं। गेहूं का एमएसपी 2015 रुपए है और बाजार भाव 2500 से 5000 रुपए प्रति क्विवंटल है। माना जा रहा है कि आगे दाम और बढ़ सकते हैं। मध्यप्रदेश का शरबती गेहूं सबसे महंगा बिक रहा है, इसके दाम 4500 और 5000 रुपए प्रति क्विवंटल तक पहुंच गए हैं।


राजस्थान ने गेहूं खरीद टारगेट को 10 प्रतिशत तक सीमित करने की तैयारी में केंद्र के निर्देश के बाद बताया जा रहा है राजस्थान सरकार अपने गेहूँ खरीद टारगेट को करीब ढाई लाख टन तक सीमित कर सकती है, जबकि शुरुआत में 23 लाख टन से अधिक गेहूं खरीद का लक्ष्य तय किया गया था। पिछले साल भी गेहूं खरीद 23 लाख मीट्रिक टन से अधिक ही हुई थी। राजस्थान में अब तक 749 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद ही हो सकी है। राजस्थान में फिलहाल 10 जून तक का समय गेहूं खरीद के लिए तय किया गया है। इसी तरह से सभी राज्य अपने गेहूं खरीद के लक्ष्य को कम कर रहे हैं या मंडियों में खरीद को समाप्त कर रहे हैं।

पंजाब में सबसे अधिक हुई है गेहूं की खरीद बता दें, इस साल गेहूं की खेती का रकबा 2021 के मुकाबले कम रहा है। पिछले साल गेहूं का रकबा 35.14 लाख हेक्टेयर था जो इस साल 35.02 लाख हेक्टेयर रहा। 2008 के बाद यह दूसरा मौका है जब गेहूं की पैदावार में इतनी बड़ी गिरावट दिखाई पड़ रही है। मंडियों में गेहूं खरीद बंद करने की अधिसूचना मंडी बोर्ड करेगा। वैश्विक स्तर पर गेहूं की कीमतों में तेजी के बाद ज्यादातर राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद में भारी गिरावट देखी गई लेकिन केंद्रीय पूल में गेहूं की सबसे बड़ी मात्रा में योगदान देने में पंजाब ने एक बार फिर देश का नेतृत्व किया। राज्य ने अब तक 93 लाख टन से अधिक गेहूं की खरीद की है। सरकार ने किसानों को अब तक ही गेहूं खरीद के लिए 16606.85 करोड़ रुपये निर्गत किया जा चुके हैं। मंडियों में वर्तमान में औसतन सात हजार मीट्रिक टन गेहूं की आमद हो रही है। पंजाब के खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई है।

इस साल कम रहा गेहूं का रकबा, तापमान अधिक होने से सिकुड़ गया गेहूं का दाना इस साल गेहूं की खेती का रकबा 2021 के मुकाबले कम रहा है। पिछले साल गेहूं का रकबा 35.14 लाख हेक्टेयर था जो इस साल 35.02 लाख हेक्टेयर रहा। 2008 के बाद यह दूसरा मौका है जब गेहूं की पैदावार में इतनी बड़ी गिरावट दिखाई पड़ रही है। 2008 में बड़ी गिरावट के कारण तत्कालीन केंद्र सरकार ने प्राइवेट खरीद पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी लेकिन बाद में बड़ी कंपनियों के दबाव में केंद्र सरकार ने केवल 25 हजार टन गेहूं खरीदने की इजाजत दी थी। पंजाब के खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री ने लाल चंद कटारूचक ने कहा है कि सरकार की ओर से राज्य में गेहूं की खरीद की महीने भर की कवायद में शामिल किसानों, आढ़तियों, मंडी मजदूरों, ट्रांसपोर्टरों और सरकारी अधिकारियों को धन्यवाद। खरीद की गति और एमएसपी बकाया के सीधे किसानों के बैंक खातों में तेजी से वितरण कार्य बेहतर रहा। मंत्री ने कहा कि यह खराब मौसम से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के अधिकांश हिस्सों में अनाज सिकुड़ गया था।

योगी सरकार खेतों में जाकर सीधे किसानों से खरीदेगी गेहूँ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब गांवों में जाकर भी किसानों से सीधे गेहूं खरीदेगी। गांवों में किसानों से गेहूं की खरीद सचल क्रय केंद्रों के माध्यम से की जाएगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। खाद्य एवं रसद विभाग की ओर से इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया गया है। रबी विपणन वर्ष 2022-23 में एमएसपी पर गेहूं खरीदने के लिए सरकार ने बीते दिनों जो क्रय नीति जारी की थी, उसमें सिर्फ क्रय केंद्रों पर ही गेहूं खरीद की व्यवस्था थी।





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