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Ukraine Crisis: Anand Mahindra Proposes New Medical university | मेडिकल की पढ़ाई के लिए अब नहीं जाना होगा यूक्रेन, आनंद महिंद्रा का वादा, भारत में ही उपलब्ध होगी सुविधा

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रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के कारण वहाँ फंसे भारतीय छात्रों को निकालने का काम जारी है। इस जंग के कारण भारत के एक छात्र की मौत हो गई। इसके बाद से देश में मेडिकल सिस्टम अब फोकस में आ गया है। अब आनंद महिंद्रा मेडिकल कॉलेज खोलने पर विचार कर रहे हैं। जानें इसपर क्या बात होगी खास।

Updated: March 03, 2022 05:07:19 pm

यूक्रेन में रूस के हमले के कारण हजारों की संख्या में भारतीय छात्र वहाँ फंसे हुए हैं। इन छात्रों को भारत सरकार ऑपरेशन गंगा अभियान तहत वहाँ से निकाल रही है। इस जंग में भारत के एक छात्र की मौत भी वो हो गई है जिसने भारत के मेडिकल सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल ये कि आखिर ये छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जैसे देशों का रुख क्यों करते हैं। कारण कई सामने आए हैं जिसमें मेडिकल संस्थानों की हाई फीस और पढ़ाई की सुस्त व्यवस्था भी शामिल रही। अब आनंद महिंद्रा मेडिकल सिस्टम में चल रही इन परेशानियों के हल के लिए आगे आए हैं। उन्होंने देश में मेडिकल कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है।

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Amid Ukraine Crisi Anand Mahindra mulls establishing a medical university(PC: Republic)

महिंद्रा युनिवर्सिटी में खुल सकता है मेडिकल कॉलेज

दरअसल, ट्विटर पर द्योगपति और महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट को Quote किया है। उन्होंने इस ट्वीट में कहा, “मुझे नहीं पता था कि भारत में मेडिकल कॉलेजों की इतनी कमी है।”

उन्होंने टेक महिंद्रा के सीईओ सी. पी. गुरनानी टैग करते हुए कहा, “क्या हम हम महिंद्रा युनिवर्सिटी में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं?

फीस होगी कम इस ट्वीट के बाद कई यूजर्स ने कहा कि केवल भारत में सीटों की कमी के कारण बड़ी संख्या में बच्चे मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई के लिए यूक्रेन नहीं जाते। वो मेडिकल की महंगी पढ़ाई के कारण भी यूक्रेन जैसे देशों का रुख करते हैं।

जब पी. वामशिधर रेड्डी नाम के एक यूजर ने आनंद महिंद्रा से कहा कि ‘हाँ आइडिया अच्छा है लेकिन आने संस्थानों की तरह करोड़ में फीस मत रखिएगा।’ इसपर आनंद महिंद्रा ने लिखा इसका ध्यान रखा जाएगा।

इसका अर्थ है कि आनंद महिंद्रा मेडिकल कॉलेज की स्थापना करने के साथ ही उसकी फीस का भी खास ख्याल रखेंगे जिससे वो देश में ही रहकर अच्छी पढ़ाई कर सकें।

मजबूरी में देश के छात्र जाते हैं विदेश

बता दें कि National Medical Commission के अनुसार, एक वर्ष में कुल 90,825 MBBS सीटों के साथ 605 मेडिकल कॉलेज हैं और लगभग 1.6 मिलियन छात्रों ने 2021 में MBBS प्रवेश के लिए NEET की परीक्षा पास की थी।

स्पष्ट है 16 में से केवल एक छात्र ही भारत में मेडिकल की पढ़ाई के लिए चुना जाता है। ऐसे में वो यूक्रेन, बेलारूस, रूसी, जॉर्जिया, आर्मेनिया, चीन, फिलीपींस जैसे देशों का रुख करते हैं जो भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की तुलना में अच्छा है।

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