धर्म-ज्योतिष

Worship to Goddess Lakshmi to get money and fortune | धन व सौभाग्य वृद्धि के लिए देवी माता लक्ष्मी जी की आराधना, ऐसे करें

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साथ ही जानें वैभव लक्ष्मी व्रत के नियम व इसे कैसे करें शुरु?

Updated: March 06, 2022 12:11:56 pm

जगत के पालनहार भगवान विष्णु की प्रिया माता लक्ष्मी को धन व सौभाग्य की देवी माना जाता है। ऐेसे में आज के समय हर कोई मां लक्ष्मी का साथ चाहता है। जिसके चलते भक्त उनका आह्वान सप्ताह के शुक्रवार, गुरुवार दिनों में करते हैं। दरअसल जीवन में पैसों की कमी से बचने के लिए लोग मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं। इसके अलावा देवी मां को प्रसन्न करने कार्य भक्त वैभव लक्ष्मी व्रत और दीपावली में लक्ष्मी पूजन के दिन मुख्यतया अधिक करते हैं, जिसके तहत वह मां लक्ष्मी की आरती करते है।

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लेकिन, मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीका क्या आप जानते हैं? इसके तहत यदि आपसे मां लक्ष्मी रूठ गई हैं तो आप उन्हें वैभव लक्ष्मी व्रत से मना सकते हैं।

देवी माता लक्ष्मी की आरती:

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि ।
हरि प्रिये नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥
पद्मालये नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं च सर्वदे ।
सर्वभूत हितार्थाय,
वसु सृष्टिं सदा कुरुं ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥ उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

दुर्गा रुप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥ महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥ ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

वहीं शुक्रवार के दिन रूठी हुई मां लक्ष्मी को मनाने के लिए वैभव लक्ष्मी व्रत किया जाता है। दरअसल ज्योतिष के अनुसार शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी, मां दुर्गा व संतोषी माता का माना जाता है। मान्यता के अनुसार शुक्रवार के दिन विधि-विधान से पूजा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त कराती है, जिसके चलते उनका साथ जीवन में हमेशा बना रहता है।

कब से शुरू करनी चाहिए वैभव लक्ष्मी व्रत
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार शुक्रवार के दिन वैभव लक्ष्मी का व्रत रखा जाता है। ऐसे में इस व्रत को शुक्रवार से ही शुरू करना चाहिए। वहीं इस दिन माता संतोषी की भी पूजा होती है, लेकिन व्रतों का विधान अलग-अलग है।

कौन और कब तक किया जाता है वैभव लक्ष्मी व्रत
इस व्रत के संबंध में ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि इसे स्त्री व पुरुष दोनों ही कर सकते हैं। वैसे सुहागिन स्त्रियों के लिए यह व्रत ज्यादा शुभ माना गया है। ध्यान रखें कि इस व्रत का संकल्प लेने के दौरान मन में अपनी मनोकामना अवश्य कहनी चाहिए। इसके बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार भक्त को 11 या 21 शुक्रवार तक मां वैभव लक्ष्मी का व्रत करना चाहिए।

वैभव लक्ष्मी व्रत पूजन विधि
ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि वैभव लक्ष्मी की पूजा शाम को की जाती है। इस व्रत के दौरान पूरे दिन केवल फलाहार किया जा सकता है। जबकि अन्न शाम को ग्रहण कर सकते हैं। पूजा विधि के अनुसार शुक्रवार को शाम में स्नान करने के बाद पूर्व दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर इस पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें। यहां मां लक्ष्मी के बगल में ही श्रीयंत्र भी रखें। ध्यान रहे कि मां लक्ष्मी को सफेद वस्तुएं अतिप्रिय हैं अत: पूजा के दौरान श्वेत वस्त्र पहनना सबसे उचित माना जाता है। इसके अलावा इस दौरान मां लक्ष्मी को सफेद फूल और सफेद रंग की चीजों का भोग लगाना चाहिए। सफेद पुष्प के अलावा मां लक्ष्मी को गुलाब भी प्रिय है। जबकि प्रसाद में चावल की खीर माता को सर्वाधिक प्रिय मानी जाती है। वैभव लक्ष्मी कथा का पाठ पूजा के बाद जरूर करना चाहिए।

ये चीजें खा सकते हैं वैभव लक्ष्मी व्रत में
1. कच्चे केले की टिक्की ।
2. सिंघाड़े की नमकीन बर्फी ।
3. साबूदाने का पुलाव ।
4. कूटू की सब्जी ।
5. कूटू के पराठे, खीरे,आलू और मूंगफली का सलाद ।

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